NCERT Solutions for Class 10 Hindi Path-13: Sana-Sana Haath Jodi
'सना-सना हाथ जोड़ि' मधुकर उपाध्याय द्वारा रचित एक यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें लेखक हिमालय की गंगोत्री यात्रा के दौरान वहाँ की प्राकृतिक छटा, पर्यावरणीय समस्याओं, तथा गंगा नदी के प्रति लोक-आस्था का सजीव वर्णन करते हैं।
पाठ का सार एवं मुख्य बिंदु
पाठ्यपुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न: लेखक ने गंगोत्री यात्रा के दौरान प्रकृति की किन विशेषताओं का वर्णन किया है?
उत्तर: लेखक ने हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों, गहरी घाटियों, गंगोत्री ग्लेशियर के दृश्य, तथा हिमनदों से निकलने वाली गंगा की धारा की अद्भुत एवं भव्य प्राकृतिक सुंदरता का सजीव वर्णन किया है।
प्रश्न: लेखक ने पर्यावरण से संबंधित किस समस्या पर चिंता व्यक्त की है?
उत्तर: लेखक ने हिमनदों (ग्लेशियरों) के तेजी से पिघलने और सिकुड़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसके लिए वे बढ़ते तापमान, प्रदूषण एवं मानवीय हस्तक्षेप को जिम्मेदार मानते हैं, जो भविष्य में गंगा जैसी नदियों के अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है।
प्रश्न: गंगा नदी के प्रति स्थानीय लोगों तथा तीर्थयात्रियों की आस्था किस प्रकार व्यक्त होती है?
उत्तर: लेखक बताते हैं कि गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि माँ के समान पूज्य माना जाता है; असंख्य तीर्थयात्री कठिन यात्रा करके गंगोत्री पहुँचते हैं और श्रद्धा से गंगाजल का स्पर्श व पूजन करते हैं।
प्रश्न: 'सना-सना हाथ जोड़ि' शीर्षक का क्या अर्थ है और यह किस भाव को दर्शाता है?
उत्तर: 'सना-सना हाथ जोड़ि' का अर्थ है 'भीगे हुए हाथ जोड़कर' — यह शीर्षक गंगा और हिमालय के प्रति श्रद्धा, विनम्रता, तथा प्रकृति के समक्ष मनुष्य की नतमस्तक भावना को दर्शाता है।